शिक्षक दिवस पर शानदार भाषण विद्यार्थी के लिए
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| डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णा |
किसी ने ठीक ही कहा है वह जो स्कूल के दरवाजे खोलता है जेल के दरवाजे बंद करता है ऐसे दरवाजे खोलने वाला रिक्शा चलाता है किसी ने ठीक ही कहा है ऐसे जियो जैसे कि तुम्हें कल मर जाना है ऐसे सीखो कि तुम्हें हमेशा के लिए जीना है ऐसे पांच सिखाने वाला शिक्षक चलाता है किसी ने ठीक ही कहा है किसी भी देश के लोगों की शिक्षा पर उस देश का भाग्य निर्भर करता है|
किसी देश के भाग्य का निर्माता शिक्षक चलाता है प्रथम दोनों हाथों से सलाम और दिल से प्रणाम उस महान शिक्षक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के लिए जिनके जन्मदिन 5 सितंबर को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं आप हमारे देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे राजनीति
आने से पहले आपने अपने जीवन के 40 साल अध्यापन को दिए थे आज हम सभी के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि डॉक्टर राधाकृष्णन के जन्मदिन को ही शिक्षक दिवस के रूप में क्यों मनाते हैं जैसा कि आप सभी जानते हैं कि डॉक्टर सर्वपल्ली एक विख्यात दार्शनिक महान शिक्षाविद् तथा शिक्षक थे एक बार उनके कुछ शिष्य और दोस्तों ने उनका जन्मदिन मनाने का निश्चय किया इस बारे में वे उनसे अनुमति लेने गए तो उन्होंने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाए जाने की बजाय आदर्श शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा तो मुझे गर्व महसूस होगा इसी के बाद से पूरे देश में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा देश में पहली बार 5 सितंबर 1962 को शिक्षक दिवस मनाया गया था
अरे में सबसे अच्छी बात यह है कि कोई भी इसे आप से छीन नहीं सकता धन दौलत तो चोरी हो सकता है लेकिन आपकी शिक्षा नहीं इस बात का भी पूरा पूरा श्रेय एक शिक्षक को ही जाता है नन्हे-मुन्ने बच्चों पर तो शिक्षा का प्रभाव कुछ यादें की होता है शिक्षक ने जो भी कहा वह उसे पत्थर की लकीर मानते हैं मान लीजिए शिक्षक ने एक बार गलती से भी कह दिया कि 2 + 2=5 होते हैं तो माता-पिता तथा अन्य जितना मर्जी कहे कि दो जमा दो चार होते हैं नन्हे मुन्ने बच्चे नहीं मानेंगे इसी बात से आभास होता है कि शिक्षक की बातों का हमारे जीवन में कितना असर होता है इन चार पंक्तियों से शिक्षक का शुक्रगुजार करना चाहता हूं भगवान ने दी जिंदगी माता पिता ने दिया प्यार भगवान ने दी जिंदगी मां
पिता ने दिया प्यार जीवन के हर पहलू को शिक्षित करने में अपने शिक्षक का हूं शुक्रगुजार डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन गुणों की खान थे लेकिन उनके एक बूंद से शायद आप अनजान होंगे वह है उनकी हाजिर जवाबी आइए इस शुभ अवसर पर उनका एक किस्सा आपसे साझा करता हूं एक बार राधाकृष्णन जी भारतीय दर्शन पर व्याख्यान देने के लिए इंग्लैंड है वहां बड़ी संख्या में लोग उनका भाषण सुनने आए थे तभी एक अंग्रेज ने उनसे पूछा क्या हिंदू नाम का कोई समाज है कोई संस्कृति है तुम कितने बिखरे हुए हो तुम्हारा एक तरंग नहीं कोई गोरा तो कोई काला कोई धोती पहनता है तो कोई लूंगी कोई कुर्ता तो कोई कमी है देखो हम सभी अंग्रेज एक जैसे हैं एक ही रंग और एक जैसा पहनावा
राधा कृष्ण ने उस अंग्रेज का जवाब दिया घोड़े अलग-अलग रूप रंग के होते हैं पर सारे गधे एक जैसे होते हैं घोड़े अलग-अलग रूप रंग के होते हैं पर सारे गधे एक जैसे होते हैं आपसे मन की बात करना चाहता हूं शिक्षक दिवस पर मन थोड़ा बहुत दुखी भी है कुछ शिक्षक अपने ज्ञान की बोली लगाने लगे हैं गुरु शिष्य की परंपरा कहीं ना कहीं कलंकित हो रही है शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों तथा विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें सुनने को मिलती हैं शिक्षा अपने मूल्य को खोकर बाजार बनता जा रहा है
शिक्षा को लेकर बच्चों में तनाव बढ़ता ही जा रहा है नतीजा व्यक्ति गलत रास्तों और नशे को जाने-अनजाने अपना लेते हैं शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर
हम सभी विद्यार्थी और शिक्षक एक साथ मिलकर शपथ लें कि हम गुरु शिष्य के इस महान परंपरा को बेहतर ढंग से समझें और एक अच्छे समाज के निर्माण में मिलकर अपना सहयोग दें शिक्षक बनने से रोके सरकार के साथ-साथ हम सभी ने मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में नए भारत के निर्माण में अपना सहयोग दें
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